Saturday, May 11, 2013

आम आदमी की सुनो ललकार !


आम आदमी की सुनो ललकार 
खो चुकी है अस्तित्व ये सरकार 
अब न सहेंगे अब न झुकेंगे
यही है आम आदमी की पुकार 
बहन-बेटियों की बहुत खो चुके इज्ज़त 
अब बर्दाश्‍त न होगी ये सरकार 
आम आदमी की सुनो ललकार 
बहुत बहा चुकी उलटी गंगा ये सरकार 
अब आम आदमी करेगा
भ्रष्‍टाचारियों का संहार  
कोयला बेचा, 2जी बेचा, चारा खा गए चारागर 
अब न सहेंगे अब ना झुकेंगे
यही है आम आदमी की पुकार 
उखाड़ फेंक देंगे यह देश की दुश्‍मन सरकार 
फिर आम आदमी की होगी सरकार 
हज़ारो घोटाले करके भी भरा न जिसका पेट
ऐसी है हमारी सरकार 
निर्लज्‍ज अपंगता की है उदाहरण ये सरकार 
आम आदमी कैसे करे बर्दास्त ऐसी सरकार 
हमें चाहिए अपना राज यानी चाहिए स्‍वराज 
आम आदमी की है यही पुकार 
छोड़ भी दो अब तो ये गद्दी सरकार
नहीं चाहिए अब तुम्हारे  झूठे परोपकार 
अब नौजवानों की पीढी ही चलाएगी सरकार 


देश बेचने के मूड में हो तुम तो सरकार 
आम आदमी नहीं करेगा बर्दास्त अब और अत्याचार 
समय रहते सुन लो ओ गूंगी बहरी सरकार 
अब  न सहेंगे अत्याचार  
अब न सहेंगे बलात्कार 
अब न सहेंगे भ्रष्‍टाचार  
अब है आम आदमी की यही पुकार  
आम आदमी की सुन लो ललकार 
जय जवान 
जय किसान 
जय विज्ञान 
हो नारी उत्‍थान  
रचनाकार मुल्कराज सिंह

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