Sunday, March 10, 2013

भला आम जनता क्यूँ करे भरोसा पुलिस महकमे पर?

हमारे समाज में अमन चैन और शांती से जीने के लिये एक सामाजिक व प्रशासकीय व्यवस्था का निर्माण किया गया, जिसका मुख्य कारण था कहीं समाज जंगल के कानूनी नियमों पर न चल पढे और बाहुबली कमजोर और मजलूमों का शोषण न कर सके इसके लिये प्रशासकीय व्यवस्था की जिम्मेदारी थी कि पुलिस महकमें का इस्तेमाल करते हुये अमन चैन कायम रखे और समाज में रहने वाले हर व्यक्ति विशेष वह चाहे कितना ही गरीब क्यों न हो या कितना ही अमीर क्यूँ न हो, एक ही तराजू से तोले जायें, मगर हमारे समाज का व्यक्ति जो शोषित होने के बावजूद भी पुलिस महकमे से सहयोग लेने नहीं जाता क्योंकि जो परिस्थितयाँ चल रही हैं, या जो खबरें आम जनता को प्राप्त होती हैं, वह पुलिसिया महकमे को भ्रष्ट, बाहुबलियों का हथियार व मजलूम व कमजोरों के ऊपर अत्याचार करने वाला ही दर्शाती है और यह सच्चाई इस घटना से सच साबित होती नजर आ रही है| जो हमें यह दर्शा रही है कि अगर कोई बाहुबली किसी अबला के साथ रोजाना छेड़खानी करता है, उसकी शिकायत गुप्त रूप से कोई मददगार अगर करना चाहे तो यह महकमा तब तक उसकी सूचना पर अमल नहीं करेगा जब तक मददगार सामने पहुँच कर सबूत के रूप में कुछ पेश न करे| चाहे यह शोषण लगातार चलता रहे और उसका अंत बलात्कार खुदखुशी या हत्या के रूप में ही सामने क्यूँ न आये| यह महकमा तब तक इंतजार करेगा जब तक घटना घट न जाये|
इस महकमे की हालत यह है कि अगर कोई पति अपनी पत्नी के साथ रोजाना मारपीट करता है, अत्याचार करता है, जिसके बारे में आस-पास रहने वाले सभी लोगों को पता है, अगर कोई व्यक्ति इस मामले की सूचना पुलिस में गुप्त रूप से देता है, पुलिस वाले यह सूचना ले तो लेते हैं मगर उस पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं करते हैं अगर इसका कारण उस इंचार्ज से पूछा जाये जिसे इस मामले की तहकीकात की जिम्मेदारी दी गई है वह कहता है कि जब तक शिकायत करने वाला मेरे सामने नहीं आयेगा तब तक मैं कोई कार्यवाही नहीं करूँगा|
परिणाम यह होता है कि महिला के भाई को पता चलता है कि बहन के साथ उसका पति दरिंदगी की सीमा को पार करते हुये अत्याचार कर रहा है तो वह जाकर बहन के पति को समझाने की कोशिश करता है मगर पति सुनता नहीं है और भाई को ही उल्टा-सीधा बोलता है, हाथापाई करता है भाई के सामने ही बहन को गंदी-गंदी गालियाँ और मार-पिटाई करना शुरू कर देता है जिसको देखकर भाई का खून-खौल उठता है और उसे बहन के द्वारा हाथ पर पहनाई गई राखी के वक्त दिये गये वचन की याद आती है, जिसके परिणामस्वरूप वह बहन के पति का सिर फोड़ देता है, बहन का पति मर जाता है, भाई को उम्रकैद हो जाती है और बहन विधवा हो जाती है| ऐसी परिस्थिती में कौन गुनहगार है? क्या यह सब हम लोगों की समझ में नहीं आता? क्या इस मामले में यह इंचार्ज पूरी तरह से दोषी नहीं है? जो अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देकर इन तीन जिन्दगियों को बड़ी आसानी से बचा सकता था|
क्या इस इंचार्ज ने महाविद्यालयों से यही ज्ञान प्राप्त किया है? क्या ऐसे इंचार्ज इस जिम्मेदारी के लायक हैं? क्या इस इंचार्ज को तुरन्त निलंबित करके विभागीय कार्यवाही (जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही) नहीं करवानी चाहिये?
बिलकुल इन जांच अधिकारी जैसे एक जांच अधिकारी कोलार पुलिस थाने, भोपाल में कार्यरत हैं जिनका नाम है श्री नारायण दत्त मिश्रा Mob. 9826466903 जिन्हें मदर टेरेसा सीनियर सेकेन्डरी को-ऐड स्कूल के विलंब शुल्क संबंधी घोटाले के बारे में शिकायत पत्र भेजा गया मगर वह इंतजार कर रहे है कि शिकायतकर्ता सबूत लेकर उनके पास आये तभी वे वह आगे कार्यवाही करेंगे, जबकि एक अच्छे इन्साफ पसन्द जाँचकर्ता अधिकारी अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुये इस स्थिती में पहला सवाल स्कूल से कर सकता है कि क्या आप बच्चों के अभिभावकों द्वारा स्कूल की फीस समय पर जमा न हो पाने की वजह से जुर्माना लगाते हैं, अगर स्कूल हाँ कहता तो वे उससे लिखित में उनका जवाब ले सकते थे कि स्कूल प्रशासन किस आधार व किस कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुये यह जुर्माना बच्चों से वसूल कर रहे हैं? अगर स्कूल जवाब नहीं देता तो उनके प्रबंधक को थाने में बुलाकर आगे की कार्यवाही करवाई जा सकती थी लेकिन इस अधिकारी ने अपने महाविद्यालय से प्राप्त ज्ञानार्जन का परिचय देते हुये ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया और इंतजार कर रहे है कि कोई अभिभावक मानसिक रूप से व्यथित होकर स्कूल में जाये और हंगामा करे या अपनी इज्जत बचाने के लिये आत्महत्या कर लें तभी इन अधिकारी महोदय की आँख खुलेगी और पुलिस महकमा जागेगा अगर यही हालत हर थाने के जाँचकर्ताओं की रही तो किस नागरिक को विश्वास होगा इस पुलिस महकमे पर, वह शोषण के विरूद्ध आवाज उठाने की अपेक्षा शोषित होना अधिक पसंद करेगा यही कारण है ऐसे अधिकारियों की वजह से ही देश में रहने वाले आम नागरिकों का पुलिस प्रशासन पर से विश्वास उठ चुका है और वे एक आम गुंड़े-मवाली की अपेक्षा पुलिस महकमे को सबसे बड़े गुंडों की फौज मानने से भी नहीं हिचकिचाते हैं|
जरूरत है पुलिस महकमे द्वारा अपनी कार्यशैली को बदलने की जिससे आम इंसान उन पर भरोसा कर सके और अपराध होने से पहले ही अपराध को रोका जा सकें, जिससे न तो कोई मुजरिम बन पायेगा और न ही किसी का शोषण या किसी भी प्रकार का अपराध हो पायेगा| हमारी उच्च अधिकारियों से यह दरख्वास्त है कि ऐसे जाँचकर्ता के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये, जिससे इस प्रकार का बर्ताव करने वाले दूसरे अधिकारियों को यह संदेश जा सके कि देश की जनता अब जाग चुकी है सुधर जाओ, जनता के सब्र का इम्तहान मत लो, माहौल ऐसा बनाओ कि अपराधी अपराध करने का ख्याल भी दिल से मिटा दे|
हम इस अभिभावक श्री संजय डी. चौकीकर - 9329690412 को सलाम करते हैं जिन्होंने अपने बच्चे के शिक्षित भविष्य की परवाह न करते हुये देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य की खातिर यह शिकायत दाखिल की जो दुस्साहस कोई अभिभावक नहीं करता| हम चाहते हैं इन अभिभावक के हौसले की आप सभी कद्र करें और उन्हें SMS या फोन करके इनके कार्य की सराहना करें जिससे इन जैसे हजारों अभिभावक जो हजारों स्कूलों में कहीं न कहीं शोषित हो रहे हैं वे आगे आयें और शोषण के खिलाफ आवाज उठायें जिससे हमारी आने वाली भावी पीढी का भविष्य सुखद हो सके| हम चाहते हैं कि DIG और SP को ईमेल करके आगाह करें और उनसे कहें कि हम सब जाग चुके हैं अब आप लोग सोना बंद करें और देश को अपराध मुक्त राष्ट्र बनाने में सहयोग दें| आज इस अभिभावक द्वारा यह कदम उठाने की वजह से मदर टेरेसा स्कूल ने फौरन ही अपनी वेबसाईट से विलंब फीस का नियम हटा लिया, व बाद में विलंब शुल्क जो वे १५% प्रति महीने से भी ज्यादा ले रहें थे, उसे कम करके २% प्रति महीने के आस पास कर दिया है अगर इसी प्रकार हर अभिभवाक जाग जाये और शोषण के खिलाफ आवाज उठायें तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी भावी पीढी ऐसे संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने लगेगी किसी भी प्रकार का शोषण नहीं होता होगा| आप सब आगे बढ़े व अपने-अपने क्षेत्र में इस प्रकार शॉषित करने वाले स्कूलों के खिलाफ एक हो जाएं |

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