Wednesday, March 13, 2013

आखिर कब तक यह दबंग महिलाओं का शोषण करने के लिये हथकंडे अपनाते रहेंगे?


समाज में जीने के लिये इंसान को रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता पड़ती है प्रशासकीय व्यवस्था देश में रहनेवाले आम नागरिकों से कर के रूप में लिये गये धन का उपयोग करके उससे गरीब तबके के लिये वह आवश्यक सुविधायें उपलब्ध करवाती हैं, जिससे यह तबका रोटी, कपड़ा और मकान की सुविधाओं को कम खर्च में प्राप्त कर सके और इन तबकों की पहचान के लिये आवश्यक कागजात उपलब्ध करवाती है जैसे बी.पी.एल. कार्ड वगैरह| अगर कोई महिला बिना किसी प्रकार के अनैतिक आचरण या ईमानदारी से जिन्दगी व्यतीत करना चाहे तो क्षेत्र के दबंग लोग ऐसी महिलाओं का शारीरिक शोषण करने के लिये तरह-तरह के हथकंडों का उपयोग करते हैं, जिनमें मुख्य होता है आर्थिक स्त्रोत को खत्म करना, जैसे अगर वे कहीं काम पर जाते हैं तो वहाँ पर अपने प्रभाव का उपयोग करके काम से निकलवा देना यदि कहीं से इन्हें सरकारी मदद प्राप्त हो रही हो तो वहाँ के कर्मचारियों को डरा-धमकाकर ऐसी मदद इस परिवार को प्राप्त न होने देने की व्यवस्था करना या ऐसे कागजात जिनसे इन्हें सरकारी मदद हासिल हो सकती है, इन्हें बनवाने न देने के लिये उस विभाग के कर्मचारियों को धमकियाँ देना, ऐसे अनेक प्रकार के हथकंडे यह बाहुबली उपयोग करते हैं| महिला अगर दबंग के सामने झुककर उसकी सभी अनैतिक मांगों को मान लेती है और अपना शारीरिक शोषण करवाने को तैयार हो जाती है तो उस महिला को यह सारी सुविधा आसानी से उपलब्ध होने लगती हैं, इसका सीधा मतलब है कि दबंग या रईस व्यक्ति कभी भी कहीं भी किसी भी समय, किसी भी गरीब तबके की महिला का शारीरिक शोषण कर सकता है|
अगर ऐसे मामलों में किसी महिला का शारीरिक शोषण इस प्रकार से किया जा रहा हो और अगर यह मामला समाज के दूसरे तबके, पति या उनके रिश्तेदारों के समक्ष जाहिर हो जाता है तो इस मामले के मुख्य दोषी उस दबंग पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होती, बल्कि उस महिला को ही वैश्यावृति के नाम पर बदनाम किया जाता है और पति व रिश्तेदारों द्वारा उसका बहिष्कार किया जाता है| ऐसी स्थिती में अगर महिला अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ आत्महत्या कर ले तो हम किसे दोषी मानेंगे? आज ऐसे हालात हमारे देश के हर क्षेत्र में व्याप्त है, जिसकी जानकारी हर नेता या प्रशासन को पता है, मगर वे किसी भी प्रकार की रोकथाम का इंतजाम नहीं कर रही है| हमारे संगठन के सामने एक साहसी महिला जो सही मायने में एक मिसाल है, देश के सामने आई है और ऐसे दबंग के खिलाफ पुलिस कार्यवाही की माँग की है महिला का नाम श्रीमती मीना दीक्षित(पति का नाम- श्री. अनिल दीक्षित, निवासी - हाजीपुर खेड़ा, थाना खंडोली, जिला-आगरा) मोब. 9837732219 है|
यह महिला एक झोपड़ी मे रहती है, वहीं पास में रहने वाला दबंग जिसका नाम - भारती उपाध्याय(पिता का नाम- राम स्वरूप, निवासी- राम नगर खंडोली) है, यह काफी समय से महिला पर बदनियती की निगाह रखे हुये है, शराब के नशे में महिला के साथ छेड़खानी करता है और तरह-तरह के प्रलोभन देता रहता है, मगर महिला इसका विरोध करने से पीछे नहीं हटी पर जब हद्द हो गई तो इस महिला ने १८ फरवरी २०१३ को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, मगर आज तक इस दबंग पर कोई कार्यवाही नहीं हुई| यह महिला जब सस्ते मकान के संदर्भ में कागज तैयार करने श्री. तेजपाल नामक अधिकारी के पास गई तो इस दबंग बाहुबली ने उस अधिकारी को डराया-धमकाया और नौकरी से निकलवाये जाने की धमकी दी और कहा कि "इस महिला का कागज तैयार न किया जाये"| हमें इस महिला की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी, कि इन्होंने दबंग के सामने दबना स्वीकार नहीं किया बल्कि भूखे रहना और कच्चे झोपड़े में ही रहना मंजूर किया अपने तीन बच्चों और पति के साथ|
आखिर बाहुबली ने महिला की नामंजूरी को अपनी शान में गुस्ताखी समझते हुये शराब के नशे में दिनांक ०४.०३.२०१३ को इस महिला के घर पहुँचा और दरवाजा पीट-पीट कर तोड़ने की कोशिश की और बच्चों व पति को जान से मारने की धमकी और साथ ही झोपड़े में आग लगा देने की धमकी भी दी|
आखिर ऐसी स्थिती में एक महिला कब तक ऐसे दबंग बाहुबलियों से रक्षा कर सकेगी? अगर यहाँ पर इस महिला ने बच्चों के साथ आत्महत्या की तो दोषी कौन होगा? जबकि इस महिला ने थाने में भी रिपोर्ट कर दी है दिनांक १८.०२.२०१३ और जिलाधिकारी को भी रिपोर्ट की है मगर आज तक इस दबंग के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है| क्या किसी महिला को इस देश में इसी तरीके से जिन्दगी जीना पड़ेगा, विशेषकर एक गरीब तबके की महिला को, अगर इस महिला ने अति होने पर दबंग की दबंगई का विरोध करते हुये, झाँसी की रानी बन कर इस दबंग का सर्वनाश कर दिया, तो हम या हमारा समाज किसे दोषी मानेगा? इस महिला को या इस दबंग बाहुबली को? या इस प्रशासकीय व्यवस्था को जिसके नकारेपन की व्यवस्था की वजह से ऐसे दबंग बेखौफ होकर खुलेआम ऐसे अत्याचार व शोषण करते रहते हैं|
इस मामले में जब SO श्री. अजय किशोर - 9454402743 से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मेरे पास अभी रिपोर्ट आई है(मतलब बीस दिन के बाद उन्हें रिपोर्ट मिली) मैं देखता हूँ फिर कल आपको बताता हूँ, इस SO के इस रवैये से यह साफ नजर आता है कि कहीं अगर अपराध हो रहा हो या होने वाला हो तो उसके ऊपर कार्यवाही वे कम से कम बीस दिन के बाद ही करेंगे चाहे तब तक अपराध हो चुका हो और शोषिता अपने बच्चों के साथ आत्महत्या कर चुकी हो लेकिन इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि इनके पास बहाना है कि "हमारे पास बहुत से काम रहते हैं, मैं सब काम एक साथ नहीं देख सकता, जबकि किसी भी कार्य को करते वक्त एक व्यवस्था बनाई जाती है, जिसमें व्यक्ति की कार्यशैली की क्षमता के अनुसार उसे जिम्मेदारी दी जाती है| जिसकी वजह् से व्यवस्था की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलती है और कार्य समय पर पूर्ण होते हैं, अगर किसी व्यक्ति विशेष को उसकी कार्य क्षमता की अपेक्षा अधिक क्षमता वाला कार्य सौंप दिया जाये, तो व्यवस्था की कार्यप्रणाली में नकारापन झलकने लगता है और कार्य समय पर पूर्ण नहीं हो पाते, ऐसी स्थिती में उस व्यक्ति को या तो वहाँ से हटा दिया जाता है या उसका पदावनति(Demotion) कर दिया जाता है|
यहाँ पर SO के द्वारा कही गई बातचीत का यह मतलब निकलता है कि "इस प्रशासकीय व्यवस्था को बनाने वाले आला दर्जे के मूर्ख थे, जिन्होंने मुझ जैसे प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति को ऐसी जगह बैठा दिया जहाँ कार्य करना मेरे जैसों का अपमान करने के समान है| मुझे ऐसी कुर्सी-टेबल देकर बैठाना चाहिये था जहाँ पर १५-२० दिन में एकाध ही काम आये और मैं उसे आराम से पूर्ण कर सकूँ"| आगे अखिलेश यादव जी की सरकार खुद समझदार है कि ऐसी स्थिती में क्या करना चाहिये? हम अपने साथियों व पाठकों से निवेदन करते हैं कि वे देश की इस साहसी महिला को फोन करके या SMS करके उन्हें यकीन दिलायें कि वे अकेली नहीं हैं हम सब उनके साथ हैं| देश अब जाग चुका है हम आप जैसी साहसी महिलाओं का सम्मान करते हैं और आपको नमन करते हैं|

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