अन्दाज़ कुछ अलग ही मेरे सोचने का है, मंज़िल का सब को शौक़, मुझे रास्ते का है
Monday, March 04, 2013
आज मंडे को इक ख़याल आया!
आज मंडे को इक ख़याल आया
थका बुझा सा खस्ताहाल आया
कहे "शायर जी, दे दो शक्ल मुझे"
मैंने बोला, खुदा दे अक्ल तुझे
बंदा गुस्से में मुझसे कहता है
अगरचे मैं नहीं तो तू क्या है?
तू है शायर बना तो ज़ाहिर है
कहीं पे अक्ल तू भी डाल आया
आज मंडे को इक ख़याल आया!
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