Thursday, February 21, 2013

कब तक सहमा रहेगा इंडिया? आतंक का कब होगा अंत?


आतंक के नाग ने हैदराबाद में एक बार फिर जहर उगला है। हैदराबाद ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 14 और 119 लोग घायल हैं। सवाल यह उठता है कि आखिरकार कब तक हम सहम कर जिएंगे? हमारी सुरक्षा कब मजबूत होगी? कब तक दहशतगर्दी के साए में हम रहेंगे? कब होगा आतंक का अंत? चलिए हम एक नजर डालते हैं दहशतगर्दों की अब तक के करतूतों पर।
-12 नवंबर, 2012: मणिपुर की राजधानी इंफाल में बम विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत।
-एक अगस्त, 2012: पुणे के जेएम रोड पर चार सिलसिलेवार बम धमाके में एक व्यक्ति घायल हुआ।
-7 सितंबर, 2011: राजधानी के अति सुरक्षित क्षेत्र में स्थित दिल्ली हाईकोर्ट में बम धमाका, 14 लोगों की मौत।
-13 जुलाई, 2011: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में झवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर पश्चिम इलाके में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों में 26 लोग मारे गए। 130 लोग घायल हुए।
-7 दिसंबर 2010: बनारस में शीतलाघाट पर आरती के समय हुए बम विस्फोट में दो लोग मारे गए, जबकि 37 घायल हुए।
-13 फरवरी 2010: पुणे में जर्मन बेकरी
के बाहर हुए बम विस्फोट में 17 लोगों की मौत हुई। 60 लोग घायल।
-26 नवंबर 2008: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आतंकियों के इस हमले में 166 लोग मारे गए।
-30 अक्टूबर: असम में किए गए 18 बम
विस्फोट में 77 लोग मारे गए।
-21 अक्टूबर: इंफाल में मणिपुर पुलिस कमांडो कांप्लेक्स के पास शक्तिशाली विस्फोट में 17 लोगों की मौत।
-29 सितंबर: महाराष्ट्र के मालेगांव में भीड़भाड़ वाले इलाके में बम विस्फोट में पांच लोग मारे गए।
-29 सितंबर: गुजरात के मोदासा में कम तीव्रता के बम विस्फोट में एक की मौत 27 सितंबर: दिल्ली के महरौली में बम विस्फोट से तीन लोग मारे गए।
-13 सितंबर: दिल्ली में छह स्थानों पर हुए सीरियल विस्फोटों में 26 लोग मारे गए।
-26 जुलाई: दो घंटे के भीतर अहमदाबाद के बीस स्थानों पर हुए बम धमाकों में 57 लोग मारे गए।
-25 जुलाई: बेंगलूर में कम तीव्रता के बम धमाके में एक व्यक्ति की मौत।
-13 मई: जयपुर में हुए सीरियल बम
धमाकों में 68 लोग मारे गए।
-जनवरी: उत्तर प्रदेश के रामपुर में
सीआरपीएफ कैंप में हुए आतंकी हमलों में आठ लोग मारे गए।
-अक्टूबर 2007: रमजान के दौरान
अजमेर शरीफ दरगाह में हुए बम धमाके
में दो लोग मारे गए।
-19 फरवरी: समझौता एक्सप्रेस में दो
बम धमाकों के बाद लगी आग में 66
यात्री मारे गए।
-सितंबर 2006: मालेगांव की एक
मस्जिद में दो बम धमाकों में 30 लोग
मारे गए।
-जुलाई: मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात
बम धमाके हुए। इन धमाकों में 200 लोग
मारे गए, जबकि 700 घायल हुए।
-मार्च: बनारस के एक मंदिर और रेलवे
स्टेशन पर हुए दोहरे बम धमाके में 20
लोग मारे गए।
-अक्टूबर 2005: दीपावली से एक दिन
पहले दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाके सरोजनी नगर में तीन बम धमाकों में 59 लोग मारे गए।

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