Thursday, February 28, 2013

चिट्ठी देर से कैसे पहुंची?


♦ संदीप जोशी
सुबह के 6:25 बिस्मिल्लाहिर्रहमानअर्रहीम 9:2:2013  मोहतरम अहले ख़ाना (परिवार) और अहले ईमान (ईमान वालों) अस्सलाम अलैकुम। अल्लाह पाक का लाख शुक्रिया कि उसने मुझे इस मुक़ाम के लिए चुना। बाक़ी मेरी तरफ़ से आप तमाम अहले ईमान (ईमान वालों) को भी मुबारक हो कि हम सब सच्चाई और हक़ के साथ रहे और हक़ो सच्चाई की ख़ातिर आख़िरत हमारा इख़्तिताम (अंत) हो - अहले ख़ाना को मेरी तरफ़ से गुज़ारिश है कि मेरे से इख़्तेताम (अंत)पर अफ़सोस की बजाए वो इस मक़ाम का एहतराम (सम्मान) करें। अल्लाह पाक आप सबका हाफ़िज़ ओ नासिर (सुरक्षा करने वाला और मददगार) है। अल्लाह हाफ़िज़।सुबह के
6:25
बिस्मिल्लाहिर्रहमानअर्रहीम
9:2:2013
मोहतरम अहले ख़ाना (परिवार) और अहले ईमान (ईमान वालों) अस्सलाम अलैकुम।
अल्लाह पाक का लाख शुक्रिया कि उसने मुझे इस मुक़ाम के लिए चुना। बाक़ी मेरी तरफ़ से आप तमाम अहले ईमान (ईमान वालों) को भी मुबारक हो कि हम सब सच्चाई और हक़ के साथ रहे और हक़ो सच्चाई की ख़ातिर आख़िरत हमारा इख़्तिताम (अंत) हो – अहले ख़ाना को मेरी तरफ़ से गुज़ारिश है कि मेरे से इख़्तेताम (अंत)पर अफ़सोस की बजाए वो इस मक़ाम का एहतराम (सम्मान) करें। अल्लाह पाक आप सबका हाफ़िज़ ओ नासिर (सुरक्षा करने वाला और मददगार) है।
अल्लाह हाफ़िज़।
दिल्ली के गोल मार्केट के नजदीक चौबीस घंटे चलने वाले ‘भाई वीर सिंह पोस्ट ऑफिस’ में ‘स्पीड पोस्ट बुकिंग काउंटर’ के क्लर्क को जब गुरुवार की आधी रात में तिहाड़ जेल नं 3 के सुपरिटेंडेंट का लिफाफा मिला, तब उसने इसे एक “सामान्य चिठ्ठी” के रूप में लिया, उसे नहीं बताया गया कि इस लिफाफे में अफजल गुरु की फांसी की सूचना है।
उस क्लर्क ने रात के 12.04 बजे इस चिठ्ठी की बुकिंग-रसीद काटी और उसे शुक्रवार को, अफजल को फांसी दिये जाने के ठीक एक दिन पहले, जम्मू-कश्मीर जानेवाली अन्य चिठ्ठियों के साथ ही रख दिया। भारतीय डाक-विभाग ने यह चिठ्ठी 07.30 बजे सुबह के बाद एअरपोर्ट पहुंचायी, लेकिन जब तक सारी औपचारिकताएं पूरी होतीं, हवाई जहाज श्रीनगर के लिए उड़ चुका था।
भारतीय डाक-विभाग के एक अधिकारी ने ‘दि हिंदू’ को बताया, “सामान्यतः जम्मू-कश्मीर को जानेवाली प्रत्येक पोस्ट को सुरक्षा कारणों से सघन जांच-पड़ताल के बाद भेजा जाता है, सारी औपचारिकताएं पूरी होने में चार-पांच घंटे लग जाते हैं। श्रीनगर के लिए आखिरी हवाई जहाज चिठ्ठी लेकर 11.30 बजे दिन में छूटा। अब चिठ्ठी शनिवार को ही पहुंचायी जा सकती थी, जिस दिन अफजल को फांसी दी जानी थी। अगर जेल के अधिकारियों ने इस चिठ्ठी के विशेष वितरण की बात अलग से कही होती, तो निश्चित रूप से हम इसे शनिवार के एक दिन पहले, या फिर शनिवार तक पहुंचा देते।”
शनिवार की सुबह विभिन्न चैनलों पर अफजल गुरु की फांसी की खबरें प्रसारित होने लगीं। अफजल गुरु के परिवारवालों ने यह बताया कि उन्हें कोई चिठ्ठी नहीं मिली है, जबकि उसी समय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे रसीद दिखा कर यह दावा कर रहे थे कि चिठ्ठी भेजी जा चुकी है। भारतीय डाक के अधिकारी तेजी से हरकत में आये, क्योंकि तब तक संचार-मंत्री कपिल सिब्बल ने भी इस संदर्भ में जांच के आदेश दे दिये थे।
शनिवार 11.30 बजे के बाद, हवाईजहाज के श्रीनगर पहुंचने पर ही चिठ्ठी का पता लगाया जा सका। लेकिन भारतीय डाक के अधिकारी उस दिन कुछ नहीं कर सके, क्योंकि श्रीनगर और कश्मीर के ज्यादातर हिस्सों में, अफजल के गृह-नगर सोपोर तक, कर्फ्यू लगा हुआ था। दूसरा दिन रविवार का था, अधिकांश शहरों में कर्फ्यू लागू था, चिठ्ठी अब तक श्रीनगर में ही थी।
सोमवार की सुबह चिठ्ठी पहुंचाने की विशेष व्यवस्था की गयी। अंततः, उस दिन 11.00 बजे दिन में अफजल गुरु की पत्नी तबस्सुम को, सोपोर से 6 किमी दूर जागीर स्थित अपने घर में वह चिठ्ठी मिली, जिसके बारे में उसे और उसके परिवारवालों को पहले से ही सब कुछ पता था।
सौजन्य: दि हिंदू, बुधवार, फरवरी 13, 2013
अनुवाद: जावेद अख्‍तर खान, पटना

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