भोजपुरी सिनेमा का यह पचासवां साल है। दिल्ली के बादली गांव के जे जे क्लस्टर गया था। वहां दीवारों पर यह पोस्टर देखकर रोना आ गया। हम बहुत चीज़ों पर रोते रहते हैं और आंसुओं को बहाने की बजाय ब्लॉग पर पोस्ट कर देते हैं। अश्लीलता और फटीचरपने ने भोजपुरी सिनेमा का सत्यानाश किया है। भोजपुरी के संजीदा गायक,लेखक और कलाकार अक्सर इस बात का रोना रोते हैं कि सीडी क्रांति ने भोजपुरी गानों और फिल्मों को लागत में ही सस्ता नहीं किया बल्की कथानक और प्रस्तुति में भी सस्ता यानी चीप कर दिया है।
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