Wednesday, February 27, 2013

बिहार विकास का सच!

Posted: 26 Feb 2013 10:38 PM PST
♦ अभिरंजन कुमार
बिहार में एक जिला है शिवहर, जहां की प्रति व्यक्ति प्रति दिन आय है- मात्र 15 रुपये 12 पैसे। साल 2008-09 में यहां के लोग प्रति दिन 16 रुपये 61 पैसे कमाते थे। महंगाई बढ़ रही है, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, लेकिन शिवहर के हमारे भाइयों-बहनों की आमदनी घट रही है। 15 रुपये 12 पैसे में एक दुधमुंहे बच्चे का आधा लिटर दूध नहीं आ सकता। मैं तो यह सोचकर ही सिहर उठा हूं कि हमारे शिवहर का एक औसत आदमी क्या खाता-पीता होगा, क्या पहनता-ओढ़ता-बिछाता होगा, किन घरों में रहता होगा, बीमार पड़ता होगा तो जीता होगा या मरता होगा?
Bihar- Chiraiyatarh Pul
शिवहर अकेला जिला नहीं है, जहां के लोगों की आमदनी देश में सबसे तेजी से बढ़ने का दावा कर रहे बिहार में कम हो गई है। राज्य के 38 में से 7 जिलों के लोगों की आमदनी कम हो गई है। शिवहर के अलावा दूसरे पिछड़े जिले हैं- कैमूर, सिवान, पूर्वी चम्पारण, मधुबनी, बेगूसराय और शेखपुरा। मधुबनी के लोग प्रतिदिन 20 रुपये 77 पैसे, पूर्वी चंपारण के 20 रुपये 93 पैसे, शेखपुरा के 21 रुपये 61 पैसे, कैमूर के 21 रुपये 80 पैसे, सिवान के 22 रुपये 22 पैसे और बेगूसराय के 39 रुपये 23 पैसे कमाते हैं। जश्न मनाइए कि यह बिहार भारत में सबसे ज्यादा तेजी से तरक्की कर रहा है।
बिहार के 38 में से 3 जिलों शिवहर, सुपौल और मधेपुरा के लोग प्रतिदिन 20 रुपये से भी कम कमाते हैं।
38 में से 22 जिलों के लोग प्रतिदिन 25 रुपये से भी कम कमाते हैं। यानी 38 में से 19 जिले ऐसे हुए, जहां लोग हर रोज 20 रुपये से 25 रुपये के बीच कमाते हैं। यानी आधा बिहार प्रतिदिन 20 से 25 रुपये पर जी रहा है।
38 में से 31 जिलों के लोग प्रतिदिन 30 रुपये से कम कमाते हैं। यानी 9 जिले ऐसे हुए, जहां लोग प्रतिदिन 25 से 30 रुपये के बीच कमाते हैं।
अब बिहार के 7 सबसे समृद्ध जिलों की बात भी कर लें, जिनसे बाकी 31 जिलों के लोग ईर्ष्या करेंगे कि वे बहुत पैसे वाले हैं। इन तथाकथित समृद्ध और ईर्ष्या के पात्र 7 जिलों में से 5 जिलों के लोग प्रतिदिन मात्र 30 रुपये से 40 रुपये कमाते हैं। ये पांच जिले हैं- लखीसराय (30 रुपये 36 पैसे), रोहतास (30 रुपये 59 पैसे), मुजफ्फरपुर (33 रुपये 55 पैसे), बेगूसराय (39 रुपये 23 पैसे) और भागलपुर (39 रुपये 44 पैसे)।
गौर किया आपने? 38 में से 36 जिलों के लोग प्रतिदिन 40 रुपये से कम कमाते हैं।
बच गए दो। यानी ‘क्लास के फर्स्ट और सेकेंड विद्यार्थी’। सारे मास्टर साहबों और हेडमास्टर साहब के दुलारे। इनकी वजह से पूरे स्कूल का सीना गर्व के मारे हद से ज्यादा फूल चुका है। प्रिंसिपल नीतीश कुमार जी और वाइस प्रिंसिपल मोदी जी ने इन्हीं दो विद्यार्थियों के दम पर एलान कर दिया है कि उनका स्कूल देश में सबसे बढि़या रिजल्ट देने वाला स्कूल बन गया है।
तो सुनिए,
नंबर दो है मुंगेर, जहां के लोग प्रतिदिन 51 रुपये 14 पैसे कमाते हैं। उनकी मासिक आमदनी बनती है- 1555 रुपये 75 पैसे। सालाना आमदनी है- 18669 रुपये।
नंबर वन है राजधानी पटना, जहां के लोगों की प्रतिदन की कमाई है- 146 रुपये 68 पैसे। मासिक कमाई हुई 4461 रुपये 58 पैसे। सालाना कमाई 53539 रुपये।
विकासोन्मुख बिहार की इस गौरव-गाथा को और तफसील से समझिए। बिहार में न्यूनतम मजदूरी है- 156 रुपये। और बिहार की राजधानी पटना समेत सभी 38 जिलों के लोगों की प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन की कमाई न्यनतम मजदूरी से भी कम है। भारत की प्रतिव्यक्ति सालाना आय है- 60,972 रुपये। यानी प्रतिदिन की आय हुई- 167 रुपये 04 पैसे। यानी बिहार के पटना समेत सभी 38 जिलों के लोगों की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की आय देश के औसत से कम है। बिहार के सभी 38 जिलों की प्रतिव्यक्ति आय का सालाना औसत है- 25,653 रुपये। यानी प्रतिदिन की आय हुई- 70 रुपये 28 पैसे। यानी बिहार के 38 में से पटना को छोड़कर बाकी सभी 37 जिलों की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से कम है।
ये सारे आंकड़े बिहार सरकार के हैं। विकास-पुरुष, सुशासन बाबू नीतीश कुमार और सुशील मोदी के हैं। साल 2012-13 के आर्थिक सर्वेक्षण के हैं। सिर्फ विश्लेषण मेरा है और इसके लिए अर्थशास्त्री होने की जरूरत नहीं है। यह कोई साधारण पत्रकार भी कर सकता है, लेकिन बिहार के सारे अखबारों ने कुछ इस तरह की हेडलाइन बनाई थी- ‘विकास के पथ पर बढ़ता बिहार।’ शिवहर के मात्र 15 रुपये कमाने वाले आदमी के लिए कोई नहीं रोया। जिन सात जिलों की आमदनी कम हो गई, उनके लिए कोई नहीं सिहरा। 38 में से 36 जिलों के लोग प्रतिदिन 40 रुपये से कम पर जी रहे हैं, उनके लिए किसी ने हाहाकार नहीं किया।
उस औसत पर किसी ने सवाल नहीं किया, जिसमें 38 में से 37 जिलों के लोगों की औसत आमदनी राज्य की औसत आमदनी से कम पाई जाती है। सही औसत तो तब मानते, जब 38 में से 18-20 जिलों के लोग औसत से ऊपर होते और 18-20 जिलों के लोग औसत से नीचे होते। लेकिन यहां तो सिर्फ एक जिला औसत से ऊपर है और बाकी सभी 37 जिले औसत से नीचे है।
अब एक और बात। जैसे 37 जिले नीचे और 1 जिला ऊपर, फिर भी राज्य का औसत बन गया 70 रुपये 28 पैसे। वैसे ही अगर एक आदमी (नेता, माफिया, ठेकेदार, भ्रष्ट-घूसखोर, अपराधी, जमीदार टाइप) प्रतिदिन कमाए 15 हजार रुपये और 999 लोग रह जाएं ठन-ठन गोपाल, फिर भी एक हजार लोगों का औसत बन जाएगा- प्रतिदिन 15 रुपये। यही शिवहर में हो रहा है और यही समूचे बिहार में भी हो रहा है। 10 करोड़ 38 लाख की आबादी में 10 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। उनकी प्रतिदिन की आय 25 रुपये से भी कम है। आज के बिहार का सच यही है।
Abhiranjan Kumar(युवा पत्रकार अभिरंजन कुमार क्षेत्रीय हिंदी समाचार चैनल आर्यन न्यूज के कार्यकारी संपादक हैं। आर्यन की जिम्मेवारी संभालने से पहले अभिरंजन एनडीवी और पी 7 न्यूज में महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।)

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