श्री दीपक चौरसिया जी,
जबसे आपने अपने नये चैनल मैं पत्रकारिता शुरू की है, आप अन्ना आंदोलन और उससे जुड़े लोगो पर विशेषकर अरविंद केजरीवाल को निशाने पर रखकर तरह तरह के आरोप लगा रहे हैं। ये आरोप ऐसे लोगो के बयानों पर टिके हैं, जिनकी अपनी ही निष्ठा, न सिर्फ सवालों के घेरे में है, बल्कि इनमें से एक तो आंदोलन के खिलाफ षड्यंत्र करते हुए ऑन कैमरा पकड़े भी जा चुके हैं।
जो थोड़े बहुत लोग आपका यह चैनल देख पा रहे हैं, उनकी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जनता सब समझ रही है। सोशल मीडिया पर आपको इस हरकत के लिए जितने अपशब्द कहे जा रहे हैं, उतने शायद ही कभी किसी को सुनने पड़े हों। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि फिर भी दीपक चौरसिया यह क्यों कर रहे हैं? इंडिया न्यूज यह क्यों कर रहा है?
1. पहला कारण तो यही हो सकता है के आप अपने नये चैनल की टीआरपी तेजी से बढ़ाना चाहते हैं। यह तो आप जानते ही हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद देश, अन्ना आंदोलन से जुड़ी खबरों में खूब दिलचस्पी लेता है। और आप इस समय अपने चैनल को लोकप्रिय बनाने के लिए यह हथकंडा अपना रहे हैं, आप इस तर्क को शूटिंग द मेसेंजर का तर्क कह कर खारिज कर सकते हैं लेकिन जब मेसेज ही कुछ न हो और जनता को लगे कि मेसेज दुर्भावना से प्रेरित है, तो मेसेंजर की नीयत पर शक होना लाजमी है।
2. दूसरा कारण यह हो सकता है कि क्या दीपक चौरसिया किसी बड़े एजेंडा का हिस्सा बनकर तो यह सब नहीं कर रहे? थोड़ी भी गहराई से देखते हैं, तो यह बात समझ में आती है। इंडिया न्यूज कार्तिकेय शर्मा का चैनल है, जो जेसिका लाल के हत्यारे का भाई हैं और कांग्रेसी नेता और विधायक विनोद शर्मा के पुत्र हैं। यानी क्या यह सब कांग्रेस की साजिश के तहत तो नहीं किया जा रहा? क्या यह कांग्रेस की साजिश तो नहीं कि आम आदमी बनाम सत्ता की लड़ाई को आम आदमी पार्टी बनाम एक कांग्रेसी चैनल के संपादक की लड़ाई में बदल दिया जाए। पिछले दो साल में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई से ध्यान भटकाने के लिए अब तक कई साजिशें रची जा चुकी हैं।
बहरहाल, कारण जो भी हों, यहां मोटे तौर पर दो मुद्दे उठते हैं।
1. पहला तो यह कि, आपने आंदोलन से जुड़े लोगो पर, विशेषकर अरविंद केजरीवाल पर कुछ आरोप लगाये हैं, हालांकि यह तमाम आरोप मनगढ़ंत हैं, लेकिन फिर भी यदि आपको ये इतने ठीक लगते हैं तो ये मामला सिर्फ इंडिया न्यूज का नहीं देश का बन जाता है। ऐसी बहस फिर इंडिया न्यूज पर नहीं, एक चैनल से ऊपर उठकर, देश के सामने होनी चाहिए। अगर आप ऐसा कोई प्रयास करें तो हम उसका तुरंत स्वागत करेंगे। उसमें आंदोलन से जुड़े सभी प्रमुख व्यक्तियों को शामिल करिए, आंदोलन से जुड़े सबसे प्रमुख व्यक्ति आदरणीय अन्ना हजारे जी ही हैं, उनका इसमें रहना अति आवश्यक है, उनके न रहने पर, बहस में जुड़ा हर व्यक्ति दावा करता रहेगा कि अन्ना जी यह चाहते थे, अन्ना जी वह चाहते थे, सच तो तभी सामने आ सकता है, जब अन्ना जी खुद बताएंगे कि वे क्या चाहते थे।
2. दूसरा मुद्दा पिछले दस दिन के आपके चैनल के कार्यक्रमों ने एक और अहम सवाल खड़ा किया है, वह पत्रकारिता से जुड़ा है। इतिहास गवाह है कि जब जब देश की अंतरात्मा पर हमला हुआ है तब तब ईमानदार और देशभक्त पत्रकारों ने अपनी जान की बाजी लगाकर भी इसकी रक्षा की है। पत्रकारिता का काम ही मानवता और देश की अंतरात्मा की रक्षा रहा है।
लेकिन इंडिया न्यूज तो जेसिका लाल के हत्यारे के परिवार का चैनल है। दामिनी मामले की ही तरह जेसिका लाल हत्याकांड से भी देश की अंतरात्मा को गहरी चोट लगी थी, जिस तरह दामिनी मामले में लोग सड़कों पर उतरे थे, उसी तरह जेसिका लाल मामले ने भी देश को झकझोरा था। सारा देश जानता है कि जेसिका लाल हत्याकांड में इंडिया न्यूज चैनल के मालिकों के परिवार ने किस तरह गवाहों और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी। अब सवाल यह उठता है कि देश की अंतरात्मा में छुरा घोंपने वाले ये लोग अगर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को संभालेंगे तो क्या लोकतंत्र और देश के बचे रहने की उम्मीद बची रह जाती है? क्या किसी भी तरह के व्यक्ति, वो चाहे लड़कियों के व्यापारी हों, भ्रष्ट-अपराधी, चरित्रहीन, हत्यारे, शराब के ठेकेदार इत्यादि कोई भी, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का मालिक बनकर बैठ सकता है?
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की पवित्रता को बचाये रखने के लिए क्या यह जरूरी नहीं हो जाता कि इंडिया न्यूज अपनी फंडिंग के स्रोत भी जनता के सामने लगातार प्रस्तुत करता रहे? क्या बाकी खबरों की तरह इंडिया न्यूज पर यह खबर भी लगातार टिकर के जरिये लोगो तक नहीं पहुंचायी जानी चाहिए कि यह चैनल एक कांग्रेसी विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री का चैनल है?
ये मुद्दा भी इसी बहस से जुड़ा है जिन्हें आप उठा रहे हैं, और इन्हें हम भी उठाना चाहेंगे, लेकिन इस पर सार्थक बहस तभी हो सकती है जब इस बहस से जुड़े अहम किरदार इसमें शामिल हों। इसलिए इससे जुड़े प्रमुख किरदार विनोद शर्मा और कार्तिकेय शर्मा के बिना भी यह बहस अधूरी होगी। आप उन्हें भी इसमें बुलाइए।
साथ ही दोनों मुद्दों की समझ रखने वाले देश के कुछ बड़े पत्रकार भी इसमें शामिल हो सकें तो अच्छा रहेगा। यह बहस किसी टीवी चैनल की टीआरपी के लिए नहीं, देश और लोकतंत्र के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। आप इस बहस को आयोजित कीजिए हम इसमें शामिल होने को तैयार हैं। पर ध्यान रखिए कि यह मुद्दा सिर्फ इंडिया न्यूज का नहीं। दीपक चौरसिया की यह पहल सिर्फ इंडिया न्यूज के लिए नहीं बल्कि देश के लिए होनी चाहिए। इसमें सभी टीवी चैनल्स को उसे प्रसारित करने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। ऐसे में अगर दीपक चौरसिया उसकी एंकरिंग करेंगे तो कोई दूसरा चैनल इसमें दिलचस्पी नहीं लेगा। इसलिए, इसकी एंकरिंग देश के किसी नामी गिरामी, निष्ठावान व्यक्ति से करायी जानी चाहिए। यह बहस जंतर-मंतर पर आम जनता की मौजूदगी में हो और 15-20 दिन तक इसका व्यापक प्रचार हो ताकि जनता को समय रहते सूचना मिल सके।
अगर आपमें हिम्मत है तो अपने चैनल पर, इस पत्र को पूरा-पूरा पढ़कर उतनी ही बार सुनाइए, जितनी बार आप इस मुद्दे पर अन्य लोगों के बयानों को दिखाते रहे हैं। हालांकि आपकी पिछले 10 दिन की पत्रकारिता को देखते हुए हमें लगता है कि या तो आप इसे दिखाएंगे ही नहीं या फिर इसकी कुछेक लाइनों को ही तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करेंगे। क्या यही दीपक चौरसिया की पत्रकारिता है?
आप अपना धर्म पूरा कीजिए। हम अपना धर्म निभाते रहेंगे। कुदरत हमें अपने-अपने कर्मों का फल समय पर अवश्य देगी।
भवदीय
संजय सिंह
प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी
दिनांक: 21 फरवरी 2013
संजय सिंह
प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी
दिनांक: 21 फरवरी 2013

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